रानुजा ,रामदेवरा में मनाया होली का पर्व
रामदेवरा में होली का त्यौहार-
पुष्प पंखुड़ियों से सजाया बाबा का दरबार –
प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी बाबा श्री रामदेवजी महाराज के समाधि स्थल, रामदेवरा (पोखरण, जैसलमेर) में होली का त्यौहार बड़े ही धुम-धाम से मनाया गया। इस वर्ष बाबा का दरबार विशेष प्रकार के पुष्पों से सजाया गया जो मुख्य रूप से विदेश (थाईलैंड) से मंगवाए गए थे। विभिन्न पुष्प जैसे लिलियम, आर्किड, सूरजमुखी, बैंगलोर वाले गुलाबी रंग के गुलाब, जिप्सी तथा अन्य प्रकार के फुलों से सजावट की गई। यह साज-सजावट कड़ी, मेहसाना (गुजरात) से आए बाबा के भक्त बफी भाई रमी जी द्वारा अपने हाथों से किया गया।
रामापीर का होली का अभिषेक
होली के शुभ अवसर पर प्रात: अभिषेक में हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुँचे जो मनमोहक सजावट देख हर्षोल्लास से भर गए। अभिषेक के पश्चात बाबा की आरती उतारी गई तथा उन्हें भोग अर्पित किया गया। पुरा दृश्य अत्यन्त ही सुहावना था। हमने अपने कैमरे के माध्यम से केद करने की कोशिश करी है।
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ज्ञात हो की रूणीचा दरबार हर त्यौहार पर ही भव्य रूप से सजाया जाता है जिसे देखने देश-देशावर से भक्त गण रामदेवरा आते है। होली पर पुष्पों की भीनी-भीनी खुशबू, इत्र एवं गुगल धूप की महक तथा फागुण के नव रंग और हवाएं भक्तों को दरबार में दर्शन हेतु खींच ले आती है। इस साल भी भक्तों का रेला देखने योग्य था। कई भक्तों ने तो समाधि स्थल पर अपने बाबा के संग होली खेलते हुए पुष्पों की बौछार कर दी। फागुण उत्सव का यह नजारा मन को लुभा गया।

बाबा रामदेवजी स्वयं प्रभु द्वारकाधीश के अवतार है जो श्रृंगार रस के स्वामी है। जैसे श्रीजी को श्रृंगार प्रिय है वैसे ही हमारे बाबा श्रृंगार से खुश हो जाते हैं तथा अपने भक्तों की मन-इच्छा पुरण करते हैं। रामसापीर का दरबार जब भी सजाया जाता है तभी मानो यों लगता है की धनिया स्वयं ही आन पधारे हो।
रामदेवरा गावं, राजस्थान में ऐसे जगह पर स्थित है जहाँ आज भी पौराणीक विधि-विधान, प्रथाएँ तथा मारवाड़ क्षेत्र की पारम्परिक संस्कृति देखने को मिलती हैं। इसी के चलते आस-पास के गांव वाले आज भी महाराज के दर पे त्यौहारों पर नजराना भेंट करने आते है तथा अपने लिए सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
इस साल की होली बहुत ही खास रही। उम्मीद है आगे भी हम बाबा के संग बाबा श्री रामदेवजी समाधि स्थल पर ऐसे ही सारे त्यौहार मनाएंगे।
|| जय श्री रामदेवजी की ||

